अठारह स्वर
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महाभारत – यह केवल एक महाकाव्य नहीं, यह मानव-हृदय का सबसे विशाल दर्पण है।
- By: Sidharth Sharma
- ISBN: 9789378210419
- Price: 200/-
- Page: 104
- Size: 5×8
- Category: Religion / Genaral
- Language: Hindi
- Delivery Time: 07-09 Days
Description
About The Book
महाभारत – यह केवल एक महाकाव्य नहीं, यह मानव-हृदय का सबसे विशाल दर्पण है। यहाँ कोई भी पात्र पूर्णतः धवल नहीं, कोई पूर्णतः कृष्ण नहीं। हर मनुष्य अपने धर्म, अपनी विवशता, अपनी पीड़ा और अपनी निष्ठा के मध्य खड़ा है।
यह पुस्तक उन्हीं क्षणों को छूने का प्रयास है – जब महायुद्ध का घोष बंद हो जाता है, जब रथों की गर्जना थम जाती है, जब केवल एक पात्र रहता है और उसका अपना अंतर्मन। इन अठारह स्वगतों में आप उन व्यक्तियों के हृदय में प्रवेश करेंगे जिन्हें इतिहास ने या तो नायक बनाया, या खलनायक – पर पूर्ण मनुष्य कभी नहीं माना।
कुंती की वह रात्रि जब वह अपने त्यागे हुए पुत्र से लौटी; पितामह भीष्म की वह घड़ी जब उन्होंने अपने जीवन-भर के तप का अर्थ ढूँढा; गांधार-नरेश शकुनि का वह क्षण जब उसने अपने पिता की अस्थियों से बने पासों से बात की; गांधारी का वह दिन जब उसने दशकों बाद पट्टी खोली और पुत्रों के शव देखे – ये सब वे क्षण हैं जिन्हें मूल कथा ने स्पर्श तो किया, परंतु पूर्णतः खोला नहीं।
अठारह दिनों के महायुद्ध की भाँति, यहाँ अठारह स्वगत हैं। प्रत्येक स्वगत से पूर्व उसका परिदृश्य दिया गया है – ताकि अभिनेता और पाठक दोनों उस क्षण की भूमिका समझ सकें। अंत में परिशिष्ट दिया गया है – जिसमें संदर्भित पात्रों का संक्षिप्त परिचय है।
यह पुस्तक नाट्य-मंच, स्वाध्याय, और हृदय-मन्थन – तीनों के लिए है। यदि किसी एक पंक्ति से किसी पाठक को महाभारत की किसी छाया का नया अर्थ मिले, तो यह श्रम सार्थक होगा।




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