Jo Zindagi Mili

₹429.00

जो ज़िंदगी मिली एक साधारण परिवार और उसके बेटे राघव की जीवन-यात्रा पर आधारित संवेदनशील कहानी है।

  • By: Ganpat Banjara
  • ISBN: 9789378211546
  • Price: 429/-
  • Page: 273
  • Size: 6×9
  • Category: Fiction / Family & Life Drama
  • Language: Hindi
  • Delivery Time: 07-09 Days
SKU: BookAP1001P-188 Categories: , Tags: ,

Description

About The Book

जो ज़िंदगी मिली एक साधारण परिवार और उसके बेटे राघव की जीवन-यात्रा पर आधारित संवेदनशील कहानी है। यह किसी असाधारण नायक की नहीं, बल्कि उस आम इंसान की कथा है जो परिवार, जिम्मेदारियों, सपनों और बदलती परिस्थितियों के बीच अपनी ज़िंदगी को संभालता है।

साधारण परिवार में पले-बढ़े राघव को बचपन से माता-पिता का प्यार, संघर्ष और जिम्मेदारियों का महत्व समझ आता है। पढ़ाई के बाद वह नौकरी शुरू करता है और सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश करता है। विवाह के बाद पार्वती उसके जीवन में आती है। खुशियों के साथ खर्च, कर्ज और नई जिम्मेदारियाँ भी बढ़ती हैं, लेकिन दोनों मिलकर हर परिस्थिति का सामना करते हैं।

पिता की बीमारी, आर्थिक दबाव और फिर पिता बनने की जिम्मेदारी राघव को और मजबूत बनाती है। अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए वह नौकरी के साथ छोटा-सा अकाउंटिंग कार्य शुरू करता है। शुरुआत में उसे सफलता भी मिलती है और असफलता भी, लेकिन वह हार नहीं मानता।

धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाती है और एक दिन उसे यह निर्णय लेना पड़ता है कि वह सुरक्षित नौकरी में बना रहे या अपने सपनों पर भरोसा करे।

जो ज़िंदगी मिली उन लाखों साधारण लोगों की कहानी है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं, गिरते हैं और फिर उठकर आगे बढ़ते हैं। यह कहानी बताती है कि परिवार का साथ, धैर्य, मेहनत और उम्मीद इंसान को हर मुश्किल से निकलने की ताकत देते हैं।

About The Author

गणपत बंजारा राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ क्षेत्र तथा सांवरिया सेठ धाम के आसपास की मिट्टी और जीवन से जुड़े एक नए हिंदी लेखक हैं। “जो ज़िंदगी मिली” उनकी पहली पुस्तक है और इसी रचना के साथ उन्होंने साहित्य की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है।

उनके लेखन की शुरुआत किसी बड़े साहित्यिक मंच से नहीं, बल्कि आम ज़िंदगी को करीब से देखने और महसूस करने से हुई। गणपत बंजारा का मानना है कि कहानी केवल कल्पना की दुनिया नहीं होती। कई बार हमारे आसपास जी जा रही ज़िंदगी ही सबसे बड़ी कहानी होती है।

एक नए और पहली बार पुस्तक लिखने वाले लेखक के रूप में गणपत बंजारा की कोशिश कठिन साहित्यिक भाषा के बजाय ऐसी सहज, सरल और भावनात्मक भाषा में लिखने की है, जिससे पाठक कहानी को केवल पढ़े नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन के करीब महसूस भी करे।

“जो ज़िंदगी मिली” के साथ गणपत बंजारा हिंदी साहित्य में अपना पहला कदम रख रहे हैं—एक नए लेखक के रूप में, अपनी मिट्टी से जुड़ी संवेदना और आम इंसान की ज़िंदगी की कहानी लेकर।

गणपत बंजारा
चित्तौडग़ढ़, राजस्थान

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