Shakti Ki Kalam Se

199.00

यह पुस्तक सिर्फ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के मन में उठते उन अनगिनत प्रश्नों, भावनाओं, प्रेम, संघर्षों और आत्मसंवादों की यात्रा है

  • By: Shakti Srivastava
  • ISBN: 9789378210129
  • Price: 199/-
  • Page: 86
  • Size: 5×8
  • Category: Poetry/Genaral
  • Language: Hindi
  • Delivery Time: 07-09 Days
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Description

About The Book

यह पुस्तक सिर्फ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के मन में उठते उन अनगिनत प्रश्नों, भावनाओं, प्रेम, संघर्षों और आत्मसंवादों की यात्रा है जिन्हें अक्सर शब्द नहीं मिल पाते।
इन कविताओं में कहीं प्रेम की कोमलता है, कहीं बिछड़ने की टीस, कहीं समाज के बनाए रिवाज़ों पर प्रश्न हैं, तो कहीं स्वयं को पहचानने और स्वीकारने का साहस।

About The Author 

नमस्कार पाठकों,
मेरा नाम शक्ति श्रीवास्तवा है। मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हुआ। मैंने हिन्दी एवं अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. तथा बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। बचपन से ही शब्दों और भावनाओं से मेरा एक गहरा रिश्ता रहा है। कविताएँ लिखना मेरे लिए केवल एक शौक नहीं, बल्कि स्वयं को अभिव्यक्त करने का माध्यम रहा है।
मेरी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत विद्यालयी दिनों से ही हो गई थी। कस्तूरबा बालिका इंटर कॉलेज, गोंडा में अध्ययन के दौरान मुझे अपनी लेखन प्रतिभा को मंच देने के अनेक अवसर प्राप्त हुए। इसके पश्चात सरस्वती देवी नारी ज्ञानस्थली में स्नातक शिक्षा के दौरान मेरी प्राचार्या डॉ. कृष्णा सिन्हा जी तथा संगीत गुरु डॉ. मनीषा सक्सेना एवं रेनू श्रीवास्तव जी के स्नेह, प्रेरणा और मार्गदर्शन ने मेरे भीतर के रचनात्मक पक्ष को और अधिक निखारा।
जीवन के अनेक अवसरों पर मुझे सीमित समय में किसी विषय पर कविता लिखने का अवसर मिला, और हर बार शब्दों ने मेरा साथ दिया। शायद यही कारण है कि मेरी कविताएँ सहज भावनाओं से जन्म लेती हैं। वर्ष 2005 से मैं निरंतर लेखन कर रही हूँ। जीवन में जो महसूस करती हूँ, जो देखती हूँ, जो भीतर कहीं गूंजता है — वही धीरे-धीरे कविता का रूप ले लेता है।
वर्ष 2015 में मेरा विवाह विवेक कुमार श्रीवास्तव जी से हुआ, जिसके बाद मैं हैदराबाद आ गई। यहाँ भी मैंने शिक्षण कार्य जारी रखा। हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति अपने विशेष लगाव के कारण मैंने हिन्दी साहित्य में एम.ए. पूर्ण किया, जिसने मुझे हिन्दी को और गहराई से समझने तथा अपनी लेखनी को और परिपक्व बनाने का अवसर दिया।
“शक्ति की कलम से…” मेरी प्रथम काव्य पुस्तक है। इस संग्रह की कविताएँ मेरे जीवन के अनुभवों, भावनाओं, संघर्षों, रिश्तों, आत्मसंवादों और समाज के विभिन्न पहलुओं से प्रेरित हैं। मैंने इन कविताओं को सरल और आत्मीय शब्दों में लिखने का प्रयास किया है ताकि हर पाठक स्वयं को इनसे जुड़ा हुआ महसूस कर सके।
यह काव्य संग्रह कभी जीवन को नई दिशा देता है, कभी भीतर छिपे सवालों को आवाज़ देता है, और कभी ऐसा एहसास कराता है मानो यह हमारी अपनी ही कहानी हो। जिन लोगों ने मेरी कविताएँ सुनी हैं, उन्होंने उनमें अपने जीवन की झलक महसूस की है। अब यह निर्णय मैं अपने पाठकों पर छोड़ती हूँ कि वे इन शब्दों में अपने कौन-से भाव ढूँढ पाते हैं।
मैं अपने माता-पिता, गुरुजनों और उन सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने मेरे इस साहित्यिक सफर में मुझे प्रेरित और प्रोत्साहित किया। विशेष रूप से मैं अपने जीवनसाथी विवेक जी का धन्यवाद करती हूँ, जिनके सहयोग और विश्वास ने इस सपने को पुस्तक का रूप दिया।
आशा करती हूँ कि “शक्ति की कलम से…” आपको केवल पढ़ने का अनुभव ही नहीं, बल्कि जीवन को महसूस करने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान करेगी।
स्नेह एवं शुभकामनाओं सहित,
शक्ति श्रीवास्तवा

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