Bheed Aur Gulami
₹249.00
क्या हम सचमुच स्वतंत्र हैं, या केवल स्वतंत्र होने का भ्रम जी रहे हैं?
- By: Sohil Khan
- ISBN: 9789378211683
- Price: 249/-
- Page: 142
- Size: 5×8
- Category: Personal Freedom and Individualism
- Language: Hindi
- Delivery Time: 07-09 Days
- ISBN
- 9789378211683
- Publisher
- Ananta Press
- Language
- Hindi
- Pages
- 142
- Binding / format
- Paperback
- Book size
- 5x8
- Publication date
- 23/10/2026
Description
About The Book
मनुष्य जन्म से स्वतंत्र होता है, लेकिन समय के साथ समाज, परंपराएँ, विचारधाराएँ, धार्मिक मान्यताएँ, जातिगत पहचान और दूसरों की अपेक्षाएँ उसके विचारों तथा निर्णयों को प्रभावित करने लगती हैं। धीरे-धीरे वह ऐसी अदृश्य मानसिक सीमाओं में बँध जाता है, जिन्हें वह अपनी स्वाभाविक सोच समझने लगता है।
‘भीड़ और गुलामी’, लेखक सोहिल खान की एक विचारोत्तेजक पुस्तक है, जो मानसिक गुलामी, सामूहिक मनोविज्ञान, सामाजिक विभाजन, सत्ता, नेतृत्व और स्वतंत्र चिंतन के गहरे प्रश्नों की पड़ताल करती है।
सात अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक पाठकों को पहचान के निर्माण से लेकर विचारधाराओं के प्रभाव, राजनीतिक नेतृत्व, सामाजिक असमानताओं, आस्था, गरीबी, भय और भीड़ की मानसिकता तक की यात्रा पर ले जाती है।
लेखक यह प्रश्न उठाते हैं कि जब हम किसी नेता, समुदाय या विचारधारा का समर्थन करते हैं, तो क्या हमारा निर्णय वास्तव में स्वतंत्र होता है? क्या हम सत्य के आधार पर सोचते हैं, या केवल उन विचारों को स्वीकार करते हैं जो हमारी पहले से बनी मान्यताओं की पुष्टि करते हैं?
पुस्तक इस बात पर विशेष बल देती है कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल सामाजिक बंधनों से मुक्त होने में नहीं, बल्कि अपनी धारणाओं को पहचानने, उन पर प्रश्न करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बदलने के साहस में निहित है।
यह किसी विशेष विचारधारा या समुदाय का विरोध करने के बजाय मनुष्य के भीतर स्वतंत्र चेतना और तार्किक समझ विकसित करने का आह्वान करती है।
‘भीड़ और गुलामी’ उन पाठकों के लिए है जो समाज को समझना चाहते हैं, अपने विश्वासों की समीक्षा करने का साहस रखते हैं और भीड़ का अनुसरण करने के बजाय अपनी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
क्योंकि वास्तविक स्वतंत्रता जंजीरों के टूटने में नहीं, बल्कि उन्हें पहचानने और प्रश्न करने के साहस में छिपी है।






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