Parchhaiyan

145.00

“परछाइयाँ” डॉ. रावेंद्र कुमार श्रीवास्तव का एक संवेदनशील और भावप्रधान काव्य-संग्रह है, जो मनुष्य के भीतर छिपी भावनाओं, स्मृतियों और जीवन के अनकहे अनुभवों को शब्द देता है।

  • By: Dr. Ravendra Kumar Shrivastav
  • ISBN: 9789378211072
  • Price: 145/-
  • Page: 68
  • Size: 5.5×8.5
  • Category: Poetry / Hindi Poetry / Kavita Sangrah
  • Language: Hindi
  • Delivery Time: 07-09 Days
SKU: BookAP1001P-164 Category: Tags: ,

Description

About The Book

“परछाइयाँ” डॉ. रावेंद्र कुमार श्रीवास्तव का एक संवेदनशील और भावप्रधान काव्य-संग्रह है, जो मनुष्य के भीतर छिपी भावनाओं, स्मृतियों और जीवन के अनकहे अनुभवों को शब्द देता है।

इस पुस्तक की कविताएँ प्रेम, विरह, अकेलापन, अधूरे रिश्ते, उम्मीद, निराशा, आत्मचिंतन, जीवन-संघर्ष और इंसानियत जैसे विषयों को सहज और हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

संग्रह में कविता के साथ गीत और ग़ज़ल की भावभूमि वाली रचनाएँ भी शामिल हैं।

सरल भाषा और गहरी संवेदनाओं के माध्यम से यह पुस्तक पाठक को अपने ही जीवन, रिश्तों और बीते पलों की परछाइयों से जोड़ती है।

यह उन सभी पाठकों के लिए है,जिन्होंने कभी प्रेम किया है, किसी को खोया है, इंतज़ार किया है या जीवन के किसी मोड़ पर स्वयं से संवाद किया है।

About The Author

डॉ. रावेंद्र कुमार श्रीवास्तव वाराणसी के निवासी हैं। साहित्य, शिक्षा, विधि और खेल-जगत से उनका गहरा संबंध रहा है। उनकी कई पुस्तकें पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिससे उनके लेखन-चिंतन और साहित्यिक अभिरुचि का परिचय मिलता है।

श्री श्रीवास्तव ने प्रबंधन विषय में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। यह उनकी अनुशासित जीवन-दृष्टि, गहन अध्ययनशीलता और शारीरिक-मानसिक संतुलन के प्रति गंभीर समझ को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विधि अर्थात एल.एल.बी. की पढ़ाई भी की है, जिसके कारण वे एक पेशेवर अधिवक्ता के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं।

उनका व्यक्तित्व विविध अनुभवों से निर्मित है। एक ओर वे शिक्षा और शोध से जुड़े रहे हैं, दूसरी ओर विधि-क्षेत्र ने उन्हें मनुष्य, समाज, न्याय, अपराध और दंड जैसी जटिल मानवीय स्थितियों को निकट से समझने का अवसर दिया है। संभवतः यही कारण है कि उनके लेखन में केवल घटनाएँ नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपी मनोवैज्ञानिक परतें भी दिखाई देती हैं।

यह काव्य-रचना मनुष्य के भीतर चलने वाले मौन संघर्षों, संबंधों की उलझनों, परिवेश और सामाजिक परिस्थितियों, वैमनस्य भरे वातावरण को शब्द का रूप देने और समझने का गंभीर प्रयास है जिसे सुधी पाठकगण हृदय से महसूस कर सकेंगे।

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