Bharatiya Dharm evam Darshan

315.00

यह पुस्तक भारतीय धर्म और दर्शन की विविध परंपराओं को सरल, सुव्यवस्थित और विचारपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है।

  • By: Dr. Sanjay Kumar Singh / Dr. Shashi Kumar Mishra
  • ISBN: 9789378210785
  • Price: 315/-
  • Page: 207
  • Size: 5×8
  • Category: Religion → Hinduism & Philosophy
  • Language: Hindi
  • Delivery Time: 07-09 Days

Description

About The Book

यह पुस्तक भारतीय धर्म और दर्शन की विविध परंपराओं को सरल, सुव्यवस्थित और विचारपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें सिंधु–सरस्वती सभ्यता की धार्मिक चेतना से लेकर वैदिक परंपरा, शैव, शाक्त, वैष्णव, सूर्य, गणेश और स्कन्द उपासना, तथा सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत जैसे प्रमुख दर्शनों का परिचय दिया गया है। साथ ही शंकराचार्य और रामानुजाचार्य के वेदांत विचार, चार्वाक-लोकायत, जैन, बौद्ध और आजीवक जैसी वैकल्पिक दार्शनिक धाराओं को भी संतुलित दृष्टि से समझाया गया है।

पुस्तक का उद्देश्य केवल धार्मिक मान्यताओं का वर्णन करना नहीं, बल्कि उन मूल प्रश्नों को सामने लाना है जिनसे भारतीय चिंतन सदियों से जुड़ा रहा है—मनुष्य कौन है, सत्य क्या है, दुःख का कारण क्या है, कर्तव्य का स्वरूप क्या है और मुक्ति किस प्रकार संभव है। सरल भाषा, प्रवाहपूर्ण शैली और दार्शनिक विचारों की स्पष्ट व्याख्या के कारण यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और भारतीय धर्म-दर्शन में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।

About The Author

डॉ संजय कुमार सिंह एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष ,इतिहास विभाग डॉ भीमराव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय अनौगी कन्नौज के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने प्रथम श्रेणी के साथ स्नातककोत्तर की उपाधि प्राप्त की और 2005 में मध्य पूर्व गांगेय क्षेत्र में नगरीकरण ( छठी शताब्दी ई. पू से छठी शती ई .तक) विषय पर महत्वपूर्ण शोध के लिए पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। डॉ सिंह ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं एवं शोध प्रकाशनों में 25 शोध पत्र प्रकाशित कर शैक्षिक शोध में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने 44 राष्ट्रीय संगोष्ठियों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया है जो शैक्षणिक विमर्श शोध विकास में उनकी निरंतर भागीदारी को दर्शाता है। वर्तमान संस्थान में आने से पूर्व डॉ सिंह दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर
एवं दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर में सहायक आचार्य पद पर कार्यरत थे ।

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