Sarvaang Yog Vyaayaam
₹299.00
सर्वांग योग व्यायाम एक ऐसी व्यावहारिक और मार्गदर्शक पुस्तक है, जो योग को केवल शारीरिक व्यायाम न मानकर एक संतुलित एवं स्वस्थ जीवन-पद्धति के रूप में प्रस्तुत करती है।
- By: Mahesh Tripaathi
- ISBN: 9789378210112
- Price: 299/-
- Page: 167
- Size: 6×9
- Category: Health, Fitness & Well-being
- Language: Hindi
- Delivery Time: 07-09 Days
Description
About The Book
सर्वांग योग व्यायाम एक ऐसी व्यावहारिक और मार्गदर्शक पुस्तक है, जो योग को केवल शारीरिक व्यायाम न मानकर एक संतुलित एवं स्वस्थ जीवन-पद्धति के रूप में प्रस्तुत करती है। पुस्तक में योग के मूल सिद्धांतों, शरीर एवं मन के समन्वय तथा नियमित योगाभ्यास के महत्व को सरल भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक पाठकों को दैनिक जीवन में योग को सहजता से अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
इस पुस्तक की विशेषता इसकी क्रमबद्ध और सरल प्रस्तुति है। इसमें शरीर के विभिन्न अंगों—पैर, घुटने, कमर, रीढ़, कंधे, हाथ, गर्दन, चेहरे और आँखों—के लिए उपयोगी व्यायामों एवं योगासनों का विस्तृत वर्णन किया गया है। साथ ही खड़े होकर, बैठकर और लेटकर किए जाने वाले अभ्यासों को इस प्रकार समझाया गया है कि युवा, वृद्ध, महिलाएँ तथा स्वास्थ्य लाभ कर रहे व्यक्ति भी अपनी क्षमता के अनुसार उनका अभ्यास कर सकें।
महेश त्रिपाठी द्वारा लिखित यह पुस्तक केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, ऊर्जा और आत्मिक संतुलन के विकास पर भी बल देती है। प्राणायाम, ध्यान और नियमित योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ, रोगमुक्त और आनंदमय जीवन की दिशा में यह पुस्तक प्रत्येक पाठक के लिए एक प्रेरणादायक साथी सिद्ध होती है।
About The Author
महेश त्रिपाठी योग, प्राणायाम तथा प्राकृतिक जीवनशैली के प्रति पूर्णतः समर्पित एक साधक हैं। दीर्घकाल तक नियमित योगाभ्यास के माध्यम से उन्होंने तन, मन और जीवन के बीच संतुलन स्थापित करना सीखा है और इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लिया है।
उनकी विशेष रुचि सर्वांग योग साधना, प्राणायाम और ध्यान के अत्यंत सरल एवं व्यावहारिक अभ्यासों को जन-सामान्य तक पहुँचाने में है। इस पुस्तक के लेखन के पीछे लेखक का ध्येय है कि प्रत्येक व्यक्ति योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करे, ताकि वह एक स्वस्थ, रोगमुक्त और संतुलित जीवन व्यतीत कर सके।
श्री महेश त्रिपाठी की दृढ़ मान्यता है कि नियमित योगाभ्यास, संयमित आहार तथा सकारात्मक दृष्टिकोण के बल पर मनुष्य 100 वर्ष की आयु तक भी पूर्णतः स्वस्थ, ऊर्जावान और आनंदमय जीवन जी सकता है।



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